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वैकल्पिक आर्थिक वार्षिकी, भारत 2009 -10

RRP:
Price:
INR195.00
ISBN:
978-81-89564-06-1 (Pb)
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(2 Book reviews)
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Author(s):
वैकल्पिक सर्वे ग्रुप और इंडियन पोलिटिकल इकॉनोमी एसोसिएशन
Year:
सितंबर 2010
Pages:
x+187
Publisher:
दानिश बुक्स

About the Book

इस वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था के नवउदारीकरण यानी अर्थव्यवस्था का नायकत्व बड़ी संगठित पूँजी को देने और राज्य द्वारा उसे पूर्ण समर्थन देकर उत्पादन को संपत्तिवान तबकों की इच्छाओं के अनुरूप तेज रफ़्तार से बढ़ाने की मुहिम के बीस साल पूरे हो रहे हैं. इतिहास की धारा को एकबारगी उल्टी बहाने वाले ये तबके किसी भी तरह अपना मिशन पूरा करने पर आमादा हैं. इन अभिजात तबकों के मनसूबे काफी हद तक पूरे भी हुए हैं, लेकिन भारी उतार-चढ़ाव, बढ़ती बहुआयामी लागत और बाहरी अर्थव्यवस्थाओं से देश के बढ़ते रिश्तों के बावजूद उनमें इन बाहरी पक्षों के अत्यधिक लाभ और भारत की कमजोर होती स्थिति आदि की खटास भी भरती जा रही है, साथ ही, सामान्य जन के लिए मंहगाई, बेरोजगारी, विषमता, उनके संसाधनों का पूंजी और संपत्तिवान तबकों के पक्ष में बढ़ता हस्तांतरण, पर्यावरण प्रदूषण और विनाश, देश के कोने-कोने में बढाती जान-माल और सम्मान की असुरक्षा आदि की कड़वाहट भी अभूतपूर्व हद तक बढ़ गई है. नतीजतन, देश भर में असंतोष बढ़ता जा रहा है और आज उसने कई इलाकों में विद्रोह का रूप ले लिया है. इन्हीं सब परिवर्तनों का लेखा-जोखा पेश करने का यह एक प्रयास है.

अनुक्रम

प्रस्तावना    कमल नयन काबरा, व्रजेंद्र उपाध्याय और ध्रुव नारायण
  1. नवउदारीकरण के दो दशक    कमल नयन काबरा
  2. आर्थिक वृद्धि का रहस्य    राहुल चक्रवर्ती और मनाली चक्रवर्ती
  3. भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते असंतुलन : सूखा, विश्वव्यापी मंदी की मार और मंहगाई    व्रजेंद्र उपाध्याय
  4. कृषि संकट    रितेश जैन
  5. खाद्य सुरक्षा का प्रश्न    कृपा शंकर
  6. भूमंडलीय भारत में भूख का सवाल    अशोक कुमार पांडेय
  7. उद्योग    वी. उपाध्याय
  8. वैदेशिक क्षेत्र और समावेशी विकास    मनमोहन कृष्ण
  9. विश्व व्यापार संगठन और मुक्त व्यापार    अनिल
  10. शिक्षा का अधिकार    अनिल सदगोपाल
  11. भारत में जन स्वास्थ्य    ए.के. अरुण
  12. आबादी : एक समस्या?    मनाली चक्रवर्ती
  13. उदारीकरण के साये में रोजगार    कमल नयन काबरा
  14. नवउदारीकरण के दौर की बजट नीतियाँ    कमल नयन काबरा
  15. परिणाम बजट : एक निरर्थक प्रयत्न    वीरेंद्र प्रसाद माथुर
  16. नवउदारवाद की चहुंमुखी विफलता    गिरीश मिश्र
  17. सूचना प्रौद्योगिकी का खेल : वृहत संदर्भ    महेश राठी
  18. यूपीए-II : क्या हुआ तेरा वादा    अरुण कुमार त्रिपाठी
  19. वैश्विक आर्थिक संकट व समकालीन पूंजीवाद    महेंद्र सिंह
  20. आदिवासी समाज : टूटे वादों की अनटूटी श्रृंखला    ब्रह्मदेव शर्मा
  21. उदारीकरण के दौर में असंतोष और प्रतिरोध    रामशरण जोशी
 

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Reviews

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  1. IeCzxytKoDx

    Posted by Linda on 20th Aug 2011

    Super ifnromative writing; keep it up.


  2. KtPwIuxNtpgVItDWk

    Posted by Jannika on 12th Apr 2011

    Superior thinking demonstrated above. Thnaks!


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