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बिहार सबाल्टर्न स्टडी सीरीज़-4: बिहार के नट : जीने की बाजीगरी

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300
ISBN:
978-93-81144-08-4 (Hb)
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Author(s):
जोस कलापुरा और पुरुषोत्तम
Year:
2012
Pages:
174pp.
Publisher:
दानिश बुक्स

About the Book

 नट समुदाय के लोग भारत के अनेक राज्यों में मौजूद हैं  — पश्चिम में गुजरात और राजस्थान से लेकर पूरब में बिहार और बंगाल तक। पेशा और सामाजिक संगठन, दोनों ही मामलों में नट प्राचीनतम परंपरा के वाहक समुदायों में से एक हैं। विश्व के विभिन्न हिस्सों से आए यात्रिायों के यात्रा- वृत्तांतों तथा प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक साहित्य में असंख्य स्थानों पर नटों की चर्चा आई है। औपनिवेशिक काल में देश के विभिन्न हिस्सों में अपराधी जनजाति कानून की निरंकुशता को झेलने के क्रम में यह समुदाय एकजुट हुआ। अपराधी जनजाति कानून के प्रावधानों के तहत ढाए गए जुल्म का परिणाम हुआ कि सामाजिक स्तर पर यह हाशिए पर चला गया।

आज भी नटों की कोई एक बनी-बनाई छवि नहीं है। वर्चस्व की प्रवृत्ति रखने वाले तबके के लोगों में इनकी एक छवि है, तो वर्चस्व को अस्वीकार करने वालों के बीच दूसरी। एक की नजर में नट या नेटुआ समुदाय दरअसल अनाचार और दुराचार में आकंठ डूबा हुआ है। वहीं दूसरे पक्ष या दबे-कुचलों की नजर में यह वर्चस्व को स्वीकार न करने वाले संस्कृतिकर्मियों का समुदाय है। इन्हीं दो छवियों के बीच नटों की जीवनधारा गतिमान रही है।

यह पुस्तक अनधिसूचित समुदायों में रुचि रखने वाले समाजकर्मियों और मानवविज्ञानियों के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होगी।

अनुक्रम

आभार
प्राक्कथन    जी.एन. देवी  (पीडीएफ डाउनलोड करें)
प्रस्तावना
बाजीगरी का अर्थशास्त्र
अपराध की राजनीति
नट समाज
शिक्षा से जुड़े कुछ पहलू
प्रतिरोध की संस्कृति
विकास योजनाओं की परिणति
परिशिष्ट-I : आल्हा में नटगढ  का संग्राम
परिशिष्ट-II : हिरनी-बिरनी
परिशिष्ट-III : लाखा बनजारा
संदर्भ-ग्रंथ-सूची

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