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तर्क के योद्धा : भारत में भौतिकवाद, अनीश्वरवाद और मानववाद की परंपरा

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150
ISBN:
978-93-81144-12-1 (Pb)
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Author(s):
Vidya Bhushan Rawat / विद्याभूषण रावत
Year:
2011
Pages:
176pp.
Publisher:
दानिश बुक्स

About the Book

अक्सर भारत को गाँवों और परंपराओं का देश कहा जाता है, स्वाधीनता के बाद से ही गांधी के ग्रामीण भारत की एक ऐसी भोली-भाली तस्वीर पैदा की गई है जो धर्मभीरु है। यह एक ऐसी तस्वीर है, जिसके अंदर की कुछ सच्चाई को छिपाने का प्रयास लगातार किया गया ताकि गाँवों की बदलाव की इच्छा को संस्कृति के नाम पर दबा के रख दिया जाए और सत्ता शीर्ष पर यथास्थितिवादियों का कब्जा बना रहे। इसके विपरीत अगर इतिहास का ढंग से अध्ययन करें, तो पाएँगे कि भारत में सामाजिक न्याय की सारी शक्तियों ने वर्णवादी-पुरोहितवादी ताकतों के खिलाफ अनवरत संघर्ष किया है। तर्क और चिंतन हमारे समाज का हिस्सा रहा है। बुद्ध के दर्शन से शुरू हुई इस लड़ाई को कबीर, रविदास, नानक, तुकाराम, नामदेव आदि ने आगे बढाया और बाद में आयोर्थीदास, अय्यनकाली पेरियार, फुले, साहूजी महाराज, आंबेडकर, भगतसिंह, राहुल सांकृत्यायन आदि ने इसे जिंदा रखा। यह पुस्तक तर्क की इस परंपरा को जनता को दोबारा याद दिलाती है, ताकि वह यह न समझे कि धर्म निरपेक्षता, वैज्ञानिक चिंतन हमारी पंरपराओं का हिस्सा नहीं है। भारत की महान परंपराओं में भौतिकवाद, नास्तिकवाद और मानववाद सभी शामिल थे और तर्क से सभी मनीषियों ने वर्णवादी-पुरोहितवाद का पुरजोर विरोध किया।

यह पुस्तक भारत की विवेकशील जनता को समर्पित है ताकि वह इसके जरिए सांप्रदायिक शक्तियों के षड्‌यंत्र को समझे। सांप्रदायिकता का मुख्य निशाना हिंदू-मुसलमान, सिख-ईसाई नहीं, अपितु व्यक्तिगत स्वतंत्रता है। वह आजादी जो आज लोकतंत्र, स्वतंत्र चिंतन, आधुनिकता, वैज्ञानिक चिंतन के जरिए हमें हासिल हुई है।

अनुक्रम


आभार
भूमिका (पीडीएफ डाउनलोड करें)


डॉ. बी.आर. आंबेडकर
हिंदुओं का धर्म शास्त्र, उनके क्षेत्र और उनके अधिकार
फ्रांस की क्रांतिकारी सभा और 'महाड़ परिषद्‌' में काफी साम्य है (महाड  परिषद्‌ में दिया गया क्रांतिकारी अध्यक्षीय भाषण)
जातिवाद का किला कैसे टूटे?
क्या जाति-प्रथा का उन्मूलन संभव है?

पेरियार ई.वी. रामास्वामी नायकर
भगवान और इनसान

शहीद भगत सिंह
मैं नास्तिक क्यों हूँ?
सांप्रदायिक दंगे और उनका इलाज
धर्म और हमारा स्वतंत्रता संग्राम
अछूत समस्या

एम.एन. राय
मार्क्स और मनु
सिद्धपुरुषों का मनोविज्ञान

व्ला.इ. लेनिन
समाजवाद और धर्म
एक नए ईश्वर के निर्माण के विरुद्ध (मक्सिम गोर्की को पत्र)
एक नए ईश्वर के निर्माण के विरुद्ध (मक्सिम गोर्की को दूसरा पत्र)

राहुल सांकृत्यायन
तुम्हारे धर्म की क्षय
तुम्हारे भगवान की क्षय

जोतिबा गोविंदराव फुले
गुलामगीरी

संत कबीर के गीत और दोहे
संत रविदास के दोहे
पाश की कविताएँ
हरिवंशराय बच्चन
भरत व्यास
शैलेन्द्र
साहिर लुधियानवी


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